क्या गोरखपुर भी दिल्ली की राह पर?
एक समय था जब वायु प्रदूषण की चर्चा होते ही केवल दिल्ली का नाम लिया जाता था।
लेकिन आज यह सवाल गोरखपुर के हर नागरिक के मन में उठ रहा है —
क्या गोरखपुर भी उसी राह पर बढ़ रहा है?
यह सवाल डर पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि समय रहते चेताने के लिए है।
गोरखपुर की हवा क्यों बिगड़ रही है?
गोरखपुर कभी हरियाली, ताल-तलैया और स्वच्छ हवा के लिए जाना जाता था।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है।
आज शहर में:
सड़कों पर उड़ती धूल
लगातार बढ़ते वाहन
खुले में कचरा और पत्ते जलाना
बिना नियंत्रण के निर्माण कार्य
इन सबका सीधा असर पड़ता है AQI (Air Quality Index) पर।
AQI बढ़ने का मतलब है — हवा का धीरे-धीरे ज़हरीली बनना।
ज़हरीली हवा अचानक नहीं मारती,
वह रोज़ सांसों के साथ शरीर में उतरती है।
ज़हरीली हवा क्यों बन सकती है जानलेवा?
खराब हवा का असर सिर्फ खांसी या आंखों की जलन तक सीमित नहीं है।
यह लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनती है:
दमा (Asthma)
फेफड़ों की गंभीर बीमारियाँ
हार्ट अटैक और स्ट्रोक
बच्चों के फेफड़ों के विकास में रुकावट
बुज़ुर्गों के लिए जानलेवा खतरा
क्या गोरखपुर भी दिल्ली की राह पर है?
अभी नहीं — लेकिन संकेत बेहद खतरनाक हैं।
दिल्ली की कहानी भी ऐसे ही शुरू हुई थी: “थोड़ी धूल है”,
“थोड़ा धुआं है”,
“सब जगह तो है…”
और फिर एक दिन:
मास्क ज़रूरी हो गए
स्कूल बंद हुए
सांस लेना मुश्किल हो गया
अगर आज नहीं संभले, तो कल पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा।
क्या करें? (What To Do)
1. अपनी रोज़मर्रा की आदतें सुधारें
खुले में कचरा या पत्ते कभी न जलाएं
छोटी दूरी पैदल या साइकिल से तय करें
वाहन का PUC सर्टिफिकेट समय पर बनवाएं
2. घर की हवा साफ रखें
किचन में एग्जॉस्ट फैन लगाएं
रोज़ गीली सफाई करें
तुलसी, एलोवेरा, स्नेक प्लांट जैसे पौधे लगाएं
3. स्वास्थ्य की सुरक्षा करें
AQI अधिक होने पर N95 मास्क पहनें
बच्चों और बुज़ुर्गों को बाहर कम रखें
4. सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं
मोहल्ला स्तर पर सफाई अभियान चलाएं
वृक्षारोपण करें
कचरा जलाने वालों को रोकें और समझाएं
क्या न करें? (What Not To Do)
“एक बार जलाने से क्या होगा” ऐसा न सोचें
वायु प्रदूषण को केवल दिल्ली की समस्या न मानें
बीमार होने के बाद जागने की गलती न करें
पूरी जिम्मेदारी केवल सरकार पर न डालें
कड़वा लेकिन सच
सरकार नियम बना सकती है,
लेकिन हवा साफ करने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
गोरखपुर को दिल्ली बनने से आज भी रोका जा सकता है —
बस ज़रूरत है आज ही कदम उठाने की।
निष्कर्ष
यह लेख डराने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए लिखा गया है।
ताकि आने वाली पीढ़ी हमसे यह सवाल न पूछे:
“जब हवा ज़हरीली हो रही थी, तब आपने क्या किया?”
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